बरसाना में बरसे लठ्ठ, आज नंदगांव में हुरियारे दिखाएंगे जोर

चेहरे पर लंबा चूंघट, हाथों में लठ्ठ आर हास पारहास का अपन अनूठ तरीके से जवाब । प्रेम से पगे लठ्ठ खाने के लिए हुरियारों का उल्लास होली के रंगों को और भी रंगीन कर देता है। बरसाने की कुंज गलियों में हुई लठामार होली का दूसरा चरण आज पूरा होने की तैयारी है। बरसाना में जाकर राधा रानी की सखियों के लठ्ठों से घायल हुए हुरियारों का आज नंदगांव की हुरियारने गया है, दूर तक नील गगन अबीर से लाहोल तयार खडा है। गुलाबी होने के लिए तैयार खड़ा है। नंदगांव की रंगीली गली में अब से बस कुछ ही देर में अनूठी पंरपरा की तस्वीर बनेगीजी हां, ब्रज की अनूठी होली का उल्लास जारी है। आज सायं साढ़े पांच बजे से नंदगांव में लठामार होली खेली जाएगी। बरसाना की लठमार होली के अगले दिन यानी फाल्गुन शुक्ल दशमी का बरसाना के हुरियार नदगाव को हुरियारिनों से होली खेलने उनके यहां पहुंचेंगे। लठामार होली से पूर्व बरसाना और नंदगांव के गोस्वामी समाज के मध्?य गायन होगा। इसके बाद बरसाना के हरियारे नंदगांव की हुरियारनों संग हास परिहास करेंगे और इसी मनो विनोद हास पारा के मध्?य शुरु हो जाएगी लठामार होली। कृष्ण के प्रेम के प्रतीक स्वरूप इस परंपरा को देखने के लिए देश विदेश से हजारों श्रद्धालु सुबह से ही नदगाव पहूच चुक है। साय साढ़े पांच बजे से लठामार होली शुरु होगी और करीब एक घंटे तक नंदगांव की हुरियारने बरसाना के हुरियारों पर लठ्ठ बरसाएंगी। इसी के साथ लठामार होली का यहां समापान हो जाएगा। बरसाने की हुरियारिन ने लठा ठा मार-मार के नंदगांव के हरियारों को लठामार में हरा दिया था। हारे हुरियारे उनका सखियों को धमकी दी कि कल शनिवार को अपने हुरियारेन ने बरसाना भेज दीयों। तब देखिनगे उनमें कितना जोर है। बरसाना की हरियारिन ने नंदगांव के हरियारों की चुनौती को स्वीकार कर लिया। आज बरसाना की हुरियारिन अपने- अपने हुरियारों को पूरी तैयारी के साथ नंदगांव भेजेंगी। जाने से पहले बरसाने के हुरियारे राधारानी से आशीर्वाद लेकर नंदगांव जाएंगे। इधर सखियों के हाथ मार खाकर नंदगांव वापस लौटे हुरियारों ने अपने घर जाकर लठामार होली में हुई हार का किस्सा सुनाया और बताया कि बरसाने के हुरियारे होली खेलने के लिए सवेरे आ रहे हैं। पूरी तैयारी कर लो, सबरी कसक निकारनी है। यह सुनकर नंदगांव की हुरियारिनों की भुजाएं फडफ़ड़ा उठीं और सूर्योदय का इन्तजार करने लगीं। लठामार होली खेलने की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा के समय से हुई थी। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाने होली खेलने पहुंच जाया करते थे। कृष्ण और उनके सखा यहां राधा आर उनका सखिया के साथ ठिठोली और उनकी सखियों के साथ ठिठोली किया करते थे, जिस बात से नाराज होकर राधा और उनकी सभी सखियां ग्वाला पर डडे बरसाया करती थी। लाठियों के इस वार से बचने के लिए कृष्ण और उनके दोस्त ढालों और लाठी का प्रयोग करते थे। प्रेम के साथ होली खेलने का ये तरीका धीरे- धीरे परंपरा बन गया। वहीं ब्रज में एक अन्य मान्यता है किद्वापर युग में भगवान कृष्ण फाल्गुन मास की नवमी को होली खेलने बरसाना गए और बिना फगुवा (नेग) दिए ही वापस लौट आए। राधाजी ने बरसाना की सभी सखियों को एकत्रित किया और बताया कि कन्हैया बिना फगुवा दिए ही लौट गए हैं। हमें नंदगांव चलकर उनसे फगुवा लेना है। अगले दिन ही (दशमी) को बरसाना की ब्रजगोपियां होली का फगुवा लेने नंदगांव आती हैंकन्हैया की इसी लीला को जीवंत रखने के लिए यहां भी लठामार होली का आयोजन किया जाता है